PIL जनहित याचिका कब, क्यों और कैसे दायर की जाती है

Desk KhabarX
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PIL - भारत के संविधान ने हर नागरिक को अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने का हक दिया है। इसी अधिकार का एक महत्वपूर्ण माध्यम है Public Interest Litigation (PIL), जिसे हिंदी में जनहित याचिका कहा जाता है।
लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि PIL आखिर होती क्या है, इसे कौन दायर कर सकता है और क्या हर मुद्दे पर PIL लगाई जा सकती है?इस लेख में हम PIL को सरल और व्यावहारिक भाषा में समझेंगे।

PIL क्या होती है?

PIL यानी जनहित याचिका, वह कानूनी याचिका होती है जिसे किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा समाज के व्यापक हित में अदालत में दायर किया जाता है।इसमें याचिकाकर्ता का व्यक्तिगत नुकसान ज़रूरी नहीं होता।मुद्दा ऐसा होना चाहिए जो जनता के अधिकारों या हितों से जुड़ा हो।

PIL की शुरुआत कैसे हुई?

भारत में PIL की अवधारणा 1980 के दशक में उभरी। सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीशों ने यह महसूस किया कि:गरीब और कमजोर वर्गजेल में बंद कैदी पर्यावरण से जुड़े मुद्देइन मामलों में लोग अदालत तक नहीं पहुँच पा रहे थे।इसी कारण अदालतों ने PIL को स्वीकार करना शुरू किया।

PIL कौन दायर कर सकता है?

कोई भी भारतीय नागरिक सामाजिक संगठन NGO कभी-कभी अदालत खुद (Suo Motu) लेकिन शर्त यह है कि याचिका ईमानदार नीयत से दायर की गई हो।

किन मामलों में PIL दायर की जा सकती है?

PIL आमतौर पर इन विषयों पर स्वीकार की जाती है:पर्यावरण संरक्षण मानवाधिकार शिक्षा और स्वास्थ्य भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर मामले सरकारी निष्क्रियता निजी विवाद संपत्ति झगड़े व्यक्तिगत बदले की भावनाइन मामलों में PIL स्वीकार नहीं होती।

PIL कहाँ दायर की जाती है?

  • High Court
  • Supreme Court

मामले की गंभीरता और क्षेत्र के आधार पर निर्णय लिया जाता है।

PIL दायर करने की प्रक्रिया

  1. मुद्दे से जुड़े तथ्य और दस्तावेज़ जुटाएँ याचिका को सरल भाषा में तैयार करेंवकील के माध्यम से या स्वयं अदालत में फाइल करें
  2. आज कई मामलों में पत्र या ई-मेल के ज़रिये भी PIL स्वीकार की गई है।

अदालत PIL पर क्या कर सकती है?

अदालत: सरकार से जवाब मांग सकती है जाँच के आदेश दे सकती है दिशा-निर्देश जारी कर सकती है लेकिन अदालत नीति निर्धारण अपने हाथ में नहीं लेती।

PIL का दुरुपयोग और अदालत की सख्ती

बीते वर्षों में अदालतों ने यह भी देखा है कि कुछ लोग PIL का इस्तेमाल: प्रचार दबाव निजी हित के लिए कर रहे हैं।

इसी कारण अब अदालतें:

  • भारी जुर्माना
  • PIL खारिज

जैसे कदम भी उठा रही हैं।PIL लोकतंत्र का एक शक्तिशाली औज़ार है,लेकिन इसका इस्तेमाल जिम्मेदारी और ईमानदारी से होना चाहिए।जब PIL सही उद्देश्य से दायर होती है,तो यह प्रशासन और न्याय के बीच सेतु बनती है।

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